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डोनाल्ड ट्रंप का टैरि‍फ वार?: क्‍या होगी भारत की आर्थिक रणनीति‍

डोनाल्ड ट्रंप का टैरि‍फ वार?: क्‍या होगी भारत की आर्थिक रणनीति‍! हाल ही अमेरिकी चुनाव में सांसद चुने गए भारतीय मूल के सुहास सुब्रमण्यम ने कहा है कि वह भारत पर शुल्क लगाने के विरोध में हैं क्योंकि इससे दोनों देशों के बीच ट्रेड वॉर छिड़ जाएगा. सुब्रमण्यम का ये बयान ऐसे समय पर आया है जब नया ट्रम्प प्रशासन भारतीय एक्सपोर्ट पर हाई टैरिफ लगा सकता है डोनाल्ड ट्रंप के आने के बाद कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं. अब जो खबर इंटरनेशनल मार्केट में तैर रही है, वो ये है कि अमेरिका या यूं कहें कि ट्रंप प्रशासन भारत के एकसपोर्ट पर 10 फीसदी का टैरिफ लगा सकता है।

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डोनाल्ड ट्रंप का टैरि‍फ वार?: क्‍या होगी भारत की आर्थिक रणनीति‍

इसका मतलब है कि चीन के साथ अमेरिका के निशाने पर भारत भी होगा. अगर ऐसा होता है तो दोनों देशों के बीच नई तरह की जंग शुरू हो सकती है. इसका मतलब है कि दोनों देशों के बीच ट्रेड वॉर की स्थिति हो जाएगी. हाल ही अमेरिकी चुनाव में सांसद चुने गए भारतीय मूल के सुहास सुब्रमण्यम ने कहा है कि वह भारत पर शुल्क लगाने के विरोध में हैं क्योंकि इससे दोनों देशों के बीच ट्रेड वॉर छिड़ जाएगा. सुब्रमण्यम का ये बयान ऐसे समय पर आया है जब नया ट्रम्प प्रशासन भारतीय एक्सपोर्ट पर हाई टैरिफ लगा सकता है।

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भारत पर टैरिफ लगाने का सपोर्ट नहीं कर रहे हैं

सुब्रमण्यम ने एक इंटरव्यू में कहा कि वह भारत पर टैरिफ लगाने का सपोर्ट नहीं कर रहे हैं. मुझे लगता है कि यह वास्तव में बुरा होगा. इससे ट्रेड वॉर शुरू हो जाएगा. मुझे नहीं लगता कि यह किसी भी देश के लिए अच्छा है. अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में अपने चुनाव से पहले, डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत की टैरिफ संरचना पर कटाक्ष किया था और चीन और भारत जैसे देशों पर पारस्परिक टैक्स लगाने की बात की थी. ट्रम्प के अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में कार्यभार संभालने के साथ, भारतीय निर्यात पर अधिक टैरिफ लगने की संभावना है

आर्थिक रूप से एक साथ काम करेंगे, हम उतने ही मजबूत होंगे

सुब्रमण्यम ने कहा कि ऐसे कई बिजनेस हैं जो भारत में वास्तव में अच्छा काम करते हैं और कई भारतीय कंपनियां अमेरिका में विस्तार कर रही हैं. इसलिए जितना अधिक हमारे देश आर्थिक रूप से एक साथ काम करेंगे, हम उतने ही मजबूत होंगे. संयुक्त राज्य अमेरिका की फॉरेन पॉलिसी को नया आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली प्रतिनिधि सभा के सदस्य के रूप में शपथ लेने के लिए तैयार होते हुए, सुब्रमण्यम ने कहा कि वह ऐसा व्यक्ति बनना चाहते हैं जो दुनिया भर में लोकतंत्र को बढ़ावा दे. उन्होंने कहा कि उदाहरण के लिए, भारत सबसे बड़े लोकतंत्रों में से एक है और अमेरिका-भारत संबंध दोनों देशों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है

इमिग्रेशन सिस्टम में आमूल-चूल परिवर्तन की आवश्यकता

38 वर्षीय सुब्रमण्यम अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के लिए चुने गए छठे भारतीय-अमेरिकी हैं. उन्हें वर्जीनिया के 10वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से निर्वाचित घोषित किया गया और वह पूर्वी तट से निर्वाचित होने वाले पहले भारतीय-अमेरिकी हैं. उन्होंने अमेरिकी इमिग्रेशन सिस्टम में आमूलचूल बदलाव की भी वकालत की। सुब्रमण्यम ने कहा कि मैं इमिग्रेशन के बारे में बहुत कुछ सुन रहा हूं, खासकर एच-1बी वीजा वाले लोग नागरिकता और ग्रीन कार्ड पाने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि हमें संयुक्त राज्य अमेरिका में एक इमिग्रेशन सिस्टम में आमूल-चूल परिवर्तन की आवश्यकता है. हमें कानूनी इमिग्रेशन पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है. बिना दस्तावेज वाले अप्रवासियों के बारे में बहुत सारी बातें हो रही हैं और मैं निश्चित रूप से हमारी सीमा को सुरक्षित करने का समर्थन करता हूं, लेकिन हमें इससे भी अधिक करने की जरूरत है।

फेडरल जॉब्स में कटौती के आने वाले ट्रम्प प्रशासन के किसी भी कदम का भी विरोध करेंगे

सुब्रमण्यम ने कहा कि वह बड़े पैमाने पर फेडरल जॉब्स में कटौती के आने वाले ट्रम्प प्रशासन के किसी भी कदम का भी विरोध करेंगे और फेडरल वर्कफोर्स के चैंपियन बनना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि मैं यह सुनिश्चित करना चाहता हूं कि चूंकि वे प्रस्तावित सरकारी बदलाव को देखते हैं, तो इसका मतलब फेडरल इंप्लॉयज को जॉब्स से निकालना या फेडरल कांट्रैक्ट कैंसल करना नहीं है. उन्होंने कहा कि वह वर्जीनिया में फेडरल वर्कफोर्स के लिए एक चैंपियन बनने के लिए उत्सुक हैं. उन्होंने कहा कि वह (संघीय नौकरियों में कटौती के आने वाले प्रशासन के) किसी भी प्रयास का विरोध करेंगे। डोनाल्ड ट्रंप का टैरि‍फ वार?: क्‍या होगी भारत की आर्थिक रणनीति‍

Ashutosh shukla

30 वर्षों से निरन्तर सकारात्मक पत्रकारिता, संपादक यशभारत डॉट काम

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